EV Battery Warranty in India 2025: अवधि, नियम और 15 साल बाद क्या होता है?

On: Wednesday, September 10, 2025 8:30 AM
EV Battery Warranty in India

अगर आप इलेक्ट्रिक वाहन (EV) खरीदने की सोच रहे हैं, तो आपके मन में सबसे बड़ा सवाल यही होगा: “EV battery warranty in India” कैसी है? आखिरकार, एक EV की असली रूह उसकी बैटरी ही तो है, और उसकी लागत वाहन की कुल कीमत का एक बड़ा हिस्सा होती है। मैंने पिछले एक दशक में ऑटोमोबाइल सेक्टर में काम करते हुए देखा है कि ग्राहकों की सबसे बड़ी चिंता बैटरी के जीवनकाल और उसके खराब होने पर होने वाले खर्च को लेकर होती है। आज, हम इसी विषय पर गहराई से बात करेंगे। जानेंगे कि भारत में EV बैटरी वारंटी कब तक मिलती है, उसके नियम क्या हैं, और 8-10 साल बाद, यहाँ तक कि 15 साल बाद आपकी इलेक्ट्रिक कार या बाइक का क्या होता है।


Table of Contents


EV बैटरी वारंटी क्या है? समझिए बुनियादी बातें

EV Battery Warranty in India
EV Battery Warranty in India

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि EV बैटरी वारंटी आम कार की वारंटी से थोड़ी अलग होती है। यह सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग दोषों को ही कवर नहीं करती, बल्कि बैटरी की ‘क्षमता’ (Capacity) से भी जुड़ी होती है। ज्यादातर कंपनियां एक निश्चित समय (जैसे 8 साल) या किलोमीटर (जैसे 1.6 लाख km) के लिए वारंटी देती हैं, लेकिन उसके साथ एक शर्त यह भी जुड़ी होती है कि इस दौरान बैटरी की कुल क्षमता एक निर्धारित स्तर (आमतौर पर 70%) से नीचे नहीं गिरनी चाहिए।

मसलन, अगर आपकी बैटरी 5 साल में ही अपनी मूल क्षमता का सिर्फ 60% ही रह जाती है और वारंटी में 70% की गारंटी दी गई है, तो कंपनी की जिम्मेदारी बनती है कि वह आपकी बैटरी को रिपेयर या रिप्लेस करे। यही इस पूरी वारंटी का सार है।


भारत में प्रमुख EV निर्माताओं की बैटरी वारंटी: एक तुलनात्मक विश्लेषण

EV Battery Warranty in India
EV Battery Warranty in India

अब बात करते हैं भारती ब्रांड्स की वारंटी पॉलिसी की। यहाँ हर ब्रांड अपना एक अलग कार्ड खेल रहा है।

  • टाटा मोटर्स: टाटा नेक्सन EV और भविष्य में आने वाली कर्व EV जैसे मॉडल्स के लिए अब 8 साल/1.6 लाख km की स्टैंडर्ड वारंटी दे रहा है। हालाँकि, हाल की खबरों के मुताबिक, टाटा 2025 से लॉन्च होने वाले अपने नए मॉडल्स (जैसे हरियर EV) के लिए ‘लाइफटाइम वारंटी‘ का ऑफर ला सकता है। यह एक बड़ा कदम होगा, लेकिन ध्यान रखना होगा कि ‘लाइफटाइम’ की परिभाषा क्या होगी। ज्यादातर मामलों में इसका मतलब वाहन के पहले मालिक के स्वामित्व तक ही सीमित हो सकता है।
  • MG Motor: MG ZS EV अपने ‘MG E-Shield‘ के तहत 8 साल/1,60,000 km की बैटरी वारंटी देता है, जिसमें बैटरी हेल्थ 70% से कम न होने की गारंटी शामिल है। यह एक क्लियर और ट्रांसपेरेंट पॉलिसी है।
  • ह्युंडई: कोना इलेक्ट्रिक 8 साल/1,60,000 km की वारंटी प्रदान करती है।
  • ओला इलेक्ट्रिक: ओला अपनी S1 स्कूटर सीरीज के लिए 3 साल की स्टैंडर्ड वारंटी देती है, लेकिन उसके ‘एक्सटेंडेड वारंटी’ प्लान में 8 साल/80,000 km तक का विकल्प है, जो बैटरी हेल्थ को 70% से ऊपर रखने की गारंटी देता है।
  • मैटर (Matter): यह ब्रांड अपने Aera मोटरसाइकिल के लिए ‘लाइफटाइम वारंटी’ का दावा करता है। यह एक साहसिक दावा है और देखना होगा कि बाजार में इस तरह के ऑफर्स कितने सफल होते हैं।

इस तुलना से साफ है कि भारत में EV battery warranty in India का गोल्ड स्टैंडर्ड अभी 8 साल/1.6 लाख km ही है, जिसमें बैटरी हेल्थ की गारंटी शामिल है।


वारंटी के दायरे में क्या शामिल है और क्या नहीं? जानिए महत्वपूर्ण शर्तें

सिर्फ वारंटी की अवधि जानना काफी नहीं है। यह जानना बेहद जरूरी है कि उसके नियम क्या हैं। मेरे अनुभव में, ज्यादातर ग्राहक इन बारीकियों को नजरअंदाज कर देते हैं और बाद में मुश्किल में पड़ जाते हैं।

  • क्या कवर होता है?
    • बैटरी पैक की क्षमता का एक निश्चित प्रतिशत (जैसे 70%) से नीचे गिरना।
    • बैटरी सेल्स या मॉड्यूल्स में कोई मैन्युफैक्चरिंग दोष।
    • बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) में खराबी।
  • क्या कवर नहीं होता है? (इसे ध्यान से पढ़ें!)
    • दुर्घटना या अप्राकृतिक क्षति: अगर बैटरी एक्सीडेंट में क्षतिग्रस्त हो जाती है।
    • गलत तरीके से चार्ज करना: निर्माता द्वारा अनुमोदित चार्जर के अलावा किसी और चार्जर के इस्तेमाल से हुई खराबी।
    • अनधिकृत मरम्मत: अगर आपने बैटरी की मरम्मत किसी अनधिकृत सर्विस सेंटर में करवाई है।
    • निर्दिष्ट समय/माइलेज पार करना: अगर आपने वारंटी अवधि या तय किलोमीटर सीमा पार कर ली है।
    • सामान्य Wear and Tear: बैटरी का प्रदर्शन समय के साथ धीरे-धीरे कम होना, जब तक कि वह वारंटी में गारंटीशुदा स्तर से नीचे न गिर जाए।

हमेशा वारंटी डॉक्यूमेंट को अच्छी तरह पढ़ें और सेल्स एग्जीक्यूटिव से इन बिंदुओं पर स्पष्टता जरूर लें।


8 साल बाद क्या होगा? बैटरी बदलवाने की लागत और विकल्प

यह वह सवाल है जो हर संभावित EV खरीदार को परेशान करता है। 8 साल का वारंटी पीरियड खत्म होने के बाद क्या होगा? क्या बैटरी बदलनी पड़ेगी? अगर हाँ, तो उसकी कीमत कितनी होगी?

सच्चाई यह है कि अगर आपने वाहन का सही रखरखाव किया है, तो संभावना है कि बैटरी 8 साल बाद भी काम करती रहेगी, भले ही उसकी रेंज पहले जितनी न रह जाए। हो सकता है आपको पहले 150 km की जगह अब सिर्फ 100-110 km की रेंज मिले। यह पूरी तरह से आपके उपयोग और चार्जिंग आदतों पर निर्भर करता है।

अगर बैटरी पूरी तरह फेल हो जाती है और बदलवानी पड़ती है, तो खर्च काफी ज्यादा आ सकता है। एक कॉम्पैक्ट EV की बैटरी बदलवाने की लागत आज के हिसाब से लगभग 3 से 5 लाख रुपये तक हो सकती है। लेकिन घबराइए नहीं, भविष्य में जैसे-जैसे बैटरी की कीमतें कम होंगी और लोकल मैन्युफैक्चरिंग बढ़ेगी, यह खर्च कम होने की उम्मीद है। साथ ही, बैटरी रिपर्पज (Re-purpose) या रिसाइक्लिंग के विकल्प भी तेजी से विकसित हो रहे हैं, जो भविष्य में इस समस्या का समाधान बन सकते हैं।


15 साल बाद EV का क्या होता है? रीसाइक्लिंग और रीसेल वैल्यू

भारत में, एक पेट्रोल-डीजल वाहन को 15 साल बाद (एनसीआर जैसे महानगरों में) फिटनेस सर्टिफिकेट पाना मुश्किल हो जाता है। लेकिन इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ ऐसा नहीं है। सरकार EV को बढ़ावा दे रही है, इसलिए 15 साल के बाद भी उन्हें चलाने पर कोई पाबंदी नहीं है।

हालाँकि, 15 साल बाद बैटरी की स्थिति काफी कमजोर हो चुकी होगी। ऐसे में आपके पास दो विकल्प होंगे:

  1. बैटरी को बदलवाना: अगर वाहन का बाकी ढाँचा अच्छी हालत में है, तो आप एक नई बैटरी लगवाकर इसे और चला सकते हैं। उम्मीद है कि 15 साल बाद बैटरी की कीमतें काफी कम हो चुकी होंगी।
  2. बैटरी को रीसायकल या री-पर्पज करना: पुरानी EV बैटरीज अब भी अपनी 40-50% क्षमता रखती हैं। उन्हें सोलर पावर स्टोरेज, बैकअप पावर यूनिट, या कम पावर वाले उपकरणों में दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। कई कंपनियाँ अब इस दिशा में काम कर रही हैं। इसके बाद, बैटरी से कीमती धातुएं निकालकर उनका पूरी तरह रीसाइक्लिंग भी किया जाता है।

रीसेल वैल्यू की बात करें, तो अभी EV की सेकंड-हैंड वैल्यू पारंपरिक वाहनों के मुकाबले कम है, मुख्य रूप से बैटरी की उम्र को लेकर अनिश्चितता के कारण। लेकिन जैसे-जैसे लोग बैटरी हेल्थ रिपोर्ट्स और वारंटी ट्रांसफर जैसी चीजों को समझेंगे, सेकंड-हैंड EV मार्केट भी मजबूत होगा।


निष्कर्ष: वारंटी एक सुरक्षा कवच है, लेकिन सही देखभाल ज्यादा जरूरी

भारत में EV battery warranty in India का लैंडस्केप तेजी से बदल रहा है। कंपनियाँ ग्राहकों की चिंताओं को दूर करने के लिए लंबी और व्यापक वारंटी दे रही हैं। यह वारंटी आपके लिए एक सुरक्षा कवच का काम करती है और EV खरीदने का निर्णय लेने में एक अहम भूमिका निभाती है।

लेकिन मेरी आपसे यही सलाह होगी कि वारंटी पर ही पूरी तरह निर्भर न रहें। एक EV बैटरी की लाइफ सबसे ज्यादा आपकी ड्राइविंग और चार्जिंग आदतों पर निर्भर करती है। निर्माता द्वारा बताए गए दिशा-निर्देशों का पालन करें, फास्ट चार्जिंग का इस्तेमाल सोच-समझकर करें, और वाहन की नियमित सर्विसिंग करवाते रहें। ऐसा करने से न सिर्फ आपकी बैटरी लंबे समय तक स्वस्थ रहेगी, बल्कि वारंटी की शर्तों के भीतर रहने में भी मदद मिलेगी।

EV का भविष्य उज्ज्वल है, और बैटरी टेक्नोलॉजी लगातार सस्ती और बेहतर हो रही है। एक शिक्षित ग्राहक के तौर पर सही जानकारी लेकर ही EV खरीदें।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: EV बैटरी वारंटी कब तक है?

ज्यादातर प्रमुख निर्माता (जैसे टाटा, MG, ह्युंडई) 8 साल/1,60,000 किमी की बैटरी वारंटी देते हैं, जिसमें बैटरी हेल्थ 70% से नीचे न जाने की गारंटी शामिल होती है। कुछ नए ब्रांड लाइफटाइम वारंटी का भी दावा कर रहे हैं।

Q2: क्या बैटरी वारंटी दूसरे मालिक को ट्रांसफर होती है?

जी हाँ, ज्यादातर मामलों में होती है। लेकिन आपको निर्माता के अधिकृत डीलर के पास जाकर वारंटी ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी करनी होगी और एक निश्चित शुल्क देना होगा। वारंटी की शर्तें नए मालिक के लिए भी लागू रहेंगी।

Q3: अगर बैटरी वारंटी के दौरान खराब हो जाती है, तो क्या पूरी बैटरी बदल दी जाती है?

जरूरी नहीं है। ज्यादातर बैटरी पैक मॉड्यूलर होते हैं। अगर सिर्फ एक या दो मॉड्यूल खराब हुए हैं, तो कंपनी सिर्फ उन्हीं मॉड्यूल्स को बदल सकती है, न कि पूरा बैटरी पैक। इससे उनका खर्च कम होता है।

Q4: क्या बैटरी वारंटी में चार्जिंग केबल भी शामिल होता है?

नहीं, आमतौर पर बैटरी वारंटी में चार्जिंग केबल या वॉलबॉक्स शामिल नहीं होते। उनकी अलग वारंटी होती है, जो आमतौर पर 1-3 साल की हो सकती है। अपने वारंटी दस्तावेज में इसकी जांच जरूर कर लें।

Q5: 15 साल बाद EV का क्या होता है?

15 साल बाद भी EV चलाने पर कोई पाबंदी नहीं है। बैटरी की परफॉर्मेंस कम हो जाएगी, लेकिन आप चाहें तो उसे बदलवा सकते हैं या फिर वाहन को रीसाइक्लिंग के लिए दे सकते हैं। पुरानी बैटरी को एनर्जी स्टोरेज जैसे दूसरे कामों में दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।

Q5. EV बैटरी वारंटी में क्या कवर होता है?

बैटरी क्षमता गिरना (70% से नीचे), सेल डिफेक्ट, और कुछ इलेक्ट्रिकल फॉल्ट्स। एक्सीडेंट या गलत चार्जिंग से हुए नुकसान कवर नहीं होते।


डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। EV बैटरी वारंटी की शर्तें और अवधि अलग-अलग निर्माताओं के बीच अलग-अलग हो सकती हैं और समय के साथ बदल सकती हैं। किसी भी EV को खरीदने से पहले कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट से नवीनतम वारंटी विवरण की जांच करें और अधिकृत डीलर से सभी शर्तों की पुष्टि अवश्य कर लें।

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SKumar

नमस्ते! मैं NayiGaadi.in का founder हूँ। मुझे कारों, बाइक्स और EVs की दुनिया को आसान भाषा में समझाना पसंद है। मैं भारतीय सड़कों और बजट को ध्यान में रखकर प्रैक्टिकल रिव्यू, ऑन-रोड कीमतें, EV रेंज और तुलना प्रदान करता हूँ—ताकि आप सही गाड़ी चुन सकें।

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